नजरों मे इक हया का सुरूर भी तो रखिए।जिंदगी में थोड़ा बहुत गुरूर भी तो रखिए।।माना कि पाबंदियों मे कुछ भी नही आसां।खुद के उसूलों को मशहूर भी तो रखिए।।मन भागता है पीछे तकलीफ जहां कम हो।अपने को इस व्यसन से कुछ दूर भी तो रखिए भेदेगा बुलंदियों को यकीनन तीर-ए-निशाना।खुद को कभी मेहनत से चूर भी तो रखिए।।
Nice one,, kar to hum sab le,, par is kavita ko humesh yaad to rakhiye
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