आग लगने पर कुआँ खोदते समझदार ,
अफ़सोस जल्द ही कुआँ,
अधूरा छोड़ दिया जायेगा ।
फिर से आग लगेगी,
कुएं में कचरा मिलेगा,
हम फिर चीखेंगे,
चिल्लायेंगे, दहाड़ेंगे
लेकिन फिर से, मातम शोर मचायेगा ।
समझ नही आता,
ये मेरी समझ से परे है,
कब तक सिंह अपनी गुफा में बुद्बुदायेगा,
कब तक यूँ ही गीदड़ खुलेआम गुर्रायेगा।

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